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लेखनी प्रतियोगिता -09-Jan-2024

विषय :-  महफिल


तेरी महफिल में, मैं आज वीराना सा बैठा हूं..
 तेरी आगोश में,‌ अफसाना सा बैठा हूं ।।
बस इतनी सी आस है, पलट कर देख ले एक बार तू ?
क्योंकि अब तेरी जिंदगी में, मैं अनजाना सा बैठा हूं ।।

आपके आने से मेरी, महफिल जगमगा गई ।
मेरी सूनी जिंदगी को,  एक नई आश मिल गई ।।
क्या कहूं ? कैसे कहूं ? कितनी खूबसूरत है आप ,
कि आपको देख, पूरी महफिल शर्मा गई ।।


.......रबिना विश्वकर्मा ( उत्तर प्रदेश)

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7 Comments

Rupesh Kumar

21-Jan-2024 05:24 PM

Nice one

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Khushbu

18-Jan-2024 05:28 PM

Very nice

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Sushi saxena

16-Jan-2024 09:28 PM

Nice

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